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Saturday, February 5, 2011

orkut - my profile

orkut

न खुदा मिला न खुदाई मीली,

महोब्बतमे हमें तो तन्हाई मीली ।

अय खुदा तेरे जहांका निझाम कैसा है ?

ऊन्हे वफा मीली हमे रूसवाई मीली ।

काफी था खूं हमारा बयाने उल्फतको,

ईसलिये न कलम मीली न रोशनाई मीली ।

न तो शौहरत मीली न तो दौलत मीली,

फिर कयूं जनाजेपे आखें सब झिलमिलाई मीली ?

संजीदा था " राझ " सिर्फ अपने ही हालपे,

जो भी मिला हालत सभीकी लडखडाई मीली ।


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