न खुदा मिला न खुदाई मीली, महोब्बतमे हमें तो तन्हाई मीली । अय खुदा तेरे जहांका निझाम कैसा है ? ऊन्हे वफा मीली हमे रूसवाई मीली । काफी था खूं हमारा बयाने उल्फतको, ईसलिये न कलम मीली न रोशनाई मीली । न तो शौहरत मीली न तो दौलत मीली, फिर कयूं जनाजेपे आखें सब झिलमिलाई मीली ? संजीदा था " राझ " सिर्फ अपने ही हालपे, जो भी मिला हालत सभीकी लडखडाई मीली । |
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